16 February 2022

भेड़िया आया की कहानी | The Boy Who Cried Wolf Story In Hindi

Wolf came

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक चरवाहा रहा करता था। उसके पास कई सारी भेड़ थीं, जिन्हें चराने वह पास के जंगल में जाया करता था। हर रोज सुबह वह भेड़ों को जंगल ले जाता और शाम तक वापस घर लौट आता। पूरा दिन भेड़ घास चरतीं और चरवाहा बैठा-बैठा ऊबता रहता। इस वजह से वह हर रोज खुद का मनोरंजन करने के नए नए तरीके ढूंढता रहता था।

एक दिन उसे एक नई शरारत सूझी। उसने सोचा, क्यों न इस बार मनोरंजन गांव वालों के साथ किया जाए। यही सोच कर उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया “बचाओ-बचाओ भेड़िया आया, भेड़िया आया।”

उसकी आवाज सुन कर गांव वाले लाठी और डंडे लेकर दौड़ते हुए उसकी मदद करने आए। जैसे ही गांव वाले वहां पहुंचे, उन्होंने देखा कि वहां कोई भेड़िया नहीं है और चरवाहा पेट पकड़ कर हंस रहा था। “हाहाहा, बड़ा मजा आया। मैं तो मजाक कर रहा था। कैसे दौड़ते-दौड़ते आए हो सब, हाहाहा।” उसकी ये बातें सुन कर गांव वालों का चेहरा गुस्से से लाल-पीला होने लगा। एक आदमी ने कहा कि हम सब अपना काम छोड़ कर, तुम्हें बचाने आए हैं और तुम हंस रहे हो ? ऐसा कह कर सभी लोग वापस अपने अपने काम की ओर लौट गए।

कुछ दिन बीतने के बाद, गांव वालों ने फिर से चरवाहे की आवाज सुनी। “बचाओ बचाओ भेड़िया आया, बचाओ।” यह सुनते ही, वो फिर से चरवाहे की मदद करने के लिए दौड़ पड़े। दौड़ते-हांफते गांव वाले वहां पहुंचे, तो क्या देखते हैं? वो देखते हैं कि चरवाहा अपनी भेड़ों के साथ आराम से खड़ा है और गांव वालों की तरफ देख कर जोर-जोर से हंस रहा है। इस बार गांव वालों को और गुस्सा आया। उन सभी ने चरवाहे को खूब खरी-खोटी सुनाई, लेकिन चरवाहे को अक्ल न आई। उसने फिर दो-तीन बार ऐसा ही किया और मजाक में चिल्लाते हुए गांव वालों को इकठ्ठा कर लिया। अब गांव वालों ने चरवाहे की बात पर भरोसा करना बंद कर दिया था।

एक दिन गांव वाले अपने खेतों में काम कर रहे थे और उन्हें फिर से चरवाहे के चिल्लाने की आवाज आई। “बचाओ बचाओ भेड़िया आया, भेड़िया आया बचाओ”, लेकिन इस बार किसी ने भी उसकी बात पर गौर नहीं किया। सभी आपस में कहने लगे कि इसका तो काम ही है दिन भर यूं मजाक करना। चरवाहा लगातार चिल्ला रहा था, “अरे कोई तो आओ, मेरी मदद करो, इस भेड़िए को भगाओ”, लेकिन इस बार कोई भी उसकी मदद करने वहां नहीं पहुंचा।

चरवाहा चिल्लाता रहा, लेकिन गांव वाले नहीं आए और भेड़िया एक-एक करके उसकी सारी भेड़ों को खा गया। यह सब देख चरवाहा रोने लगा। जब बहुत रात तक चरवाहा घर नहीं आया, तो गांव वाले उसे ढूंढते हुए जंगल पहुंचे। वहां पहुंच कर उन्होंने देखा कि चरवाहा पेड़ पर बैठा रो रहा था।

गांव वालों ने किसी तरह चरवाहे को पेड़ से उतारा। उस दिन चरवाहे की जान तो बच गई, लेकिन उसकी प्यारी भेड़ें भेड़िए का शिकार बन चुकी थीं। चरवाहे को अपनी गलती का एहसास हो गया था और उसने गांव वालों से माफी मांगी। चरवाहा बोला “मुझे माफ कर दो भाइयों, मैंने झूठ बोल कर बहुत बड़ी गलती कर दी। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।”

कहानी से सीख

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। झूठ बोलना बहुत बुरी बात होती है। झूठ बोलने की वजह से हम लोगों का विश्वास खोने लगते हैं और समय आने पर कोई हमारी मदद नहीं करता।

कछुए और खरगोश की कहानी | Kachua Aur Khargosh Ki Kahani

Turtle and rabbit story

एक वक्त की बात है, किसी घने जंगल में एक खरगोश रहता था, जिसे अपने तेज दौड़ने पर बहुत घमंड था। उसे जंगल में जो दिखता, वो उसी को अपने साथ दौड़ लगाने की चुनौती दे देता। दूसरे जानवरों के बीच वो हमेशा खुद की तारीफ करता और कई बार दूसरे का मजाक भी उड़ाता।

एक बार उसे एक कछुआ दिखा, उसकी सुस्त चाल को देखते हुए खरगोश ने कछुए को भी दौड़ लगाने की चुनौती दे दी। कछुए ने खरगोश की चुनौती मान ली और दौड़ लगाने के लिए तैयार हो गया।

जंगल के सभी जानवर कछुए और खरगोश की दौड़ देखने के लिए जमा हो गए। दौड़ शुरू हो गई और खरगोश तेजी से दौड़ने लगा और कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ने लगा। थोड़ी दूर पहुंचने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा, तो उसे कछुआ कहीं नहीं दिखा। खरगोश ने सोचा, कछुआ तो बहुत धीरे-धीरे चल रहा है और उसे यहां तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाएगा, क्यों न थोड़ी देर आराम ही कर लिया जाए। यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा।

पेड़ के नीचे सुस्ताते-सुस्ताते कब उसकी आंख लग गई, उसे पता भी नहीं चला। उधर, कछुआ धीरे-धीरे और बिना रुके लक्ष्य तक पहुंच गया। उसकी जीत देखकर बाकी जानवरों ने तालियां बजानी शुरू कर दी। तालियों की आवाज सुनकर खरगोश की नींद खुल गई और वो दौड़कर जीत की रेखा तक पहुंचा, लेकिन कछुआ तो पहले ही जीत चुका था और खरगोश पछताता रह गया।

कहानी से सीख

इस कहानी से यही सीख मिलती है कि जो धैर्य और मेहनत से काम करता है, उसकी जीत पक्की होती है और जिन्हें खुद पर या अपने किए हुए कार्य पर घमंड होता है, उसका घमंड कभी न कभी टूटता जरूर है।

लोमड़ी और अंगूर की कहानी | Fox And Grapes Story In Hindi

Story of fox and grape-1

एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह खाने की तलाश में इधर-उधर भटकने लगी। काफी समय तक घूमने के बाद भी उसे खाने को कुछ भी न मिला, तभी उसकी नजर पास के एक बाग पर पड़ी। बाग बहुत ही सुन्दर और हरा-भरा था। उस बाग से बड़ी ही मीठी सुगंध आ रही थी। उसे एहसास हो चला कि अब उसकी खाने की तलाश जल्द ही खत्म होने वाली है। वह तेजी से बाग की ओर अपने कदम बढ़ाने लगी।

जैसे-जैसे वह कदम आगे बढ़ाती, बाग से आने वाली महक और भी तेज होती जाती। उसने मन ही मन सोचा कि इस बाग में कुछ तो खास होगा, जो उसे खाने को मिलेगा। इसी सोच के साथ वह और तेजी से आगे बढ़ने लगी। जैसे ही वह बाग में पहुंची, तो उसने देखा कि बाग तो अंगूर की बेलों से लदा हुआ है। सभी अंगूर पूरी तरह से पक चुके हैं। अंगूर देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। अंगूरों की महक से उसने इस बात का अंदाजा लगा लिया कि अंगूर कितने रसदार और मीठे होंगे। वह इतनी उतावली हो चली कि मानो एक ही बार में बाग के सारे अंगूर खा जाएगी।

उसने झट से अंगूरों को लक्ष्य बनाकर एक लंबी छलांग मारी, लेकिन वह अंगूरों तक पहुंच नहीं सकी और धड़ाम से जमीन पर आ गिरी। उसका पहला प्रयास विफल हुआ। उसने सोचा क्यों न फिर से कोशिश की जाए।

वह एक बार फिर जोश से उठी और इस बार उसने अपनी पूरी ताकत से पहले से तेज अंगूरों की ओर छलांग लगा दी, लेकिन अफसोस कि उसका यह प्रयास भी बेकार गया। इस बार भी वह अंगूरों तक पहुंचने में नाकामयाब रही, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने खुद से कहा कि अगर दो प्रयास विफल हो गए तो क्या, इस बार तो सफलता मुझे मिलकर ही रहेगी।

फिर क्या था, इस बार फिर वह दोगुने जोश के साथ खड़ी हुई। इस बार उसने अब तक की सबसे लंबी छलांग लगाने की कोशिश की। उसने अपने शरीर की सारी ताकत को एकत्र कर एक लंबी दौड़ लगाई। उसे लगा था कि इस बार उसे अंगूर पाने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इस बार का प्रयास भी खाली गया। वह जमीन पर आ गिरी।

इतने जतन करने के बावजूद वह एक भी अंगूर हासिल नहीं कर पाई। ऐसे में उसने अंगूर पाने की अपनी आस छोड़ दी और हार मान ली। अपनी विफलता को छिपाने के लिए उसने खुद ही बोला कि अंगूर खट्टे हैं, इसलिए इन्हें मुझे नहीं खाना।

कहानी से सीख

लोमड़ी और खट्टे अंगूर की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर हम बिना सही प्रयास के किसी चीज को पाने में असमर्थ हैं, तो हमें उस चीज को लेकर गलत राय नहीं बनानी चाहिए। जैसा लोमड़ी ने अंगूर न मिलने पर अंगूरों को बिना चखे खट्टा कह दिया। साथ ही हमें किसी काम के लिए जल्दी हार नहीं माननी चाहिए।

प्यासे कौवे की कहानी | Pyasa Kauwa Ki Kahani

Pyasa Kauwa Ki Kahani

एक बार की बात है, गर्मियों की चिलचिलाती दोपहर में एक प्यासा कौवा पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था, लेकिन उसे पानी कहीं नहीं मिला। वह प्यासा उड़ता ही जा रहा था। उड़ते-उड़ते उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी, जिस कारण उसकी हालत खराब होने लगी। अब कौवे को लगने लगा कि उसकी मौत नजदीक है, लेकिन तभी उसकी नजर एक घड़े पर पड़ी।

वो तुरंत हिम्मत जुटाकर उस घड़े तक पहुंचा, लेकिन उसकी खुशी बस कुछ समय के लिए ही थी, क्योंकि उस घड़े में पानी तो था, लेकिन इतना नहीं था कि कौवे की चोंच उस पानी तक पहुंच सके। कौवे ने हर तरह से पानी पीने की कोशिश की, लेकिन वह पानी पीने में सफल नहीं हो पाया।

अब कौवा पहले से भी ज्यादा दुखी हो गया था, क्योंकि उसके पास पानी होते हुए भी वह प्यासा था। कुछ देर घड़े को देखते-देखते कौवे की नजर घड़े के आसपास पड़े कंकड़ों पर पड़ी और कंकड़ों को देखते ही उसके मन में एक योजना आई।

उसने सोचा कि थोड़ी मेहनत करके अगर वह एक-एक करके सारे कंकड़ घड़े में डाल दे, तो पानी ऊपर आ जाएगा और वो आसानी से पानी पी सकेगा। उसने एक-एक कर आसपास पड़े कंकड़ों को घड़े में डालना शुरू कर दिया। वह कंकड़ों को तब तक घड़े में डालता रहा, जब तक पानी ऊपर उसकी चोंच तक नहीं आ गया। फिर काफी मेहनत के बाद जब पानी ऊपर आ गया, तो कौवे ने जी भरकर पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई।

कहानी से सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी भी परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि मेहनत करने वाले को ही सफलता मिलती है।

बिल्ली के गले में घंटी की कहानी | Billi Ke Gale Mein Ghanti

एक बहुत बड़े घर में सैकड़ों चूहे रहते थे। वो अपना पेट भरने के लिए पूरे घर में टहलते थे। सभी चूहे हंसी-खुशी अपना पेट भर लिया करते थे। उनकी जिंदगी बड़े आराम से कट रही थी। अचानक एक दिन उस घर में शिकार करने के लिए, कहीं से एक बिल्ली आ गई।

बिल्ली को देखते ही सारे चूहे तेजी से अपने-अपने बिल में छिप गए। उसने देखा कि उस घर में तो बहुत सारे चूहे हैं। उसने यहीं रहने का मन बना लिया। अब बिल्ली उसी घर में रहने लगी। जब भी उसे भूख लगती, तो बिल्ली अंधेरे में जाकर छिप जाती थी। जब चूहे बाहर निकलते, तो बिल्ली उन पर झपटा मारकर खा जाती थी।

ऐसा रोज होने लगा। धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी थी। अब चूहों में दहशत फैल गई थी।

इस समस्या का हल निकालने के लिए चूहों ने एक सभा बुलाई। सभा में सभी चूहे मौजूद थे। सभी ने कई सुझाव दिए, ताकि बिल्ली के आतंक को रोका जा सके और उसका शिकार बनने से चूहे बचे रहें। किसी का सुझाव ऐसा नहीं था, जिससे बिल्ली का आंतक रोका जा सके। सभी चूहे बैठे ही थे कि अचानक से एक बूढ़े चूहे ने सुझाव दिया।

उसने कहा कि हम बिल्ली से बच सकते हैं, लेकिन उसके लिए एक घंटी और धागे की जरूरत पड़ेगी। बूढ़े चूहे ने कहा कि हम बिल्ली के गले में घंटी बांध देंगे और जब वह आएगी, तो घंटी बजने से हमें खतरे के बारे में पता चल जाएगा। खतरा जानने के बाद हम लोग भाग कर अपनी बिल में छिप जाएंगे।

इससे हम लोग बिल्ली का शिकार बनने से बचे रह सकते हैं। सभी चूहे खुशी से झूमने लगे। सबने नाचना शुरू कर दिया और खुश होने लगे कि अब तो वह बिल्ली के खतरे से बचे रहेंगे। सभी चूहे खुशियां मना ही रहे थे कि अचानक से एक अनुभवी चूहा उठ खड़ा हुआ।

उसने सभी चूहों को जोर से डांट लगाई और कहा कि चुप रहो, तुम सब मूर्ख हाे। उसके बाद अनुभवी चूहे ने जो कहा, वह सुनकर सभी का मुंह उतर गया। चूहे ने कहा कि वो सब तो ठीक है, लेकिन जब तक बिल्ली के गले में घंटी नहीं बंध जाती, तब तक हम सुरक्षित नहीं हैं। अब तुम सब पहले ये बताओ कि आखिर बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन? सभी चूहे एक दूसरे की तरफ देखने लगे। सभा में सन्नाटा छा गया था। सभी चूहे निराश हो गए। इसी बीच बिल्ले के आने की आहट पाते ही सभी चूहे भागकर अपने-अपने बिल में जाकर छिप गए।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सिर्फ योजना बना लेने भर से ही आप कामयाब नहीं हो जाते। उस योजना को लागू करने के बारे में भी सोचना चाहिए। उससे पहले जश्न मनाना बेकार है।

शेर और चूहे की कहानी | Sher Aur Chuha Ki Kahani

Lion and mouse story

एक बार की बात है, किसी जंगल में एक चूहा रहता था। एक दिन जब वो अपनी बिल की तरफ लौट रहा था, तो उसने एक गुफा में एक शेर को आराम करते देखा। शेर को मजे में सोते हुए देख चूहे के मन में शरारत सूझी। चूहा शेर की गुफा में जा घुसा और शेर के ऊपर चढ़ गया। वह शेर के ऊपर खूब उछल-कूद करने लगा और उसके बाल खींचने लगा।

चूहे की शरारतों से शेर की नींद खुल गई और उसने चूहे को अपने नुकीले पंजों में दबोच लिया। चूहे ने जब शेर के पंजे में खुद को पाया, तो वो समझ चुका था कि शेर के गुस्से से अब उसे कोई नहीं बचा सकता और आज उसकी मौत तय है।

चूहा बुरी तरह डर गया और रो-रोकर शेर से विनती करने लगा कि शेर जी, मुझे मत मारो, मुझसे भूल हो गई, मुझे जाने दो। अगर आज आप मुझे जाने देंगे, तो मैं आपके इस उपकार के बदले भविष्य में जब भी आपको किसी मदद की जरूरत होगी, मैं आपकी मदद करूंगा।

चूहे की बातें सुनकर शेर की हंसी निकल गई। शेर ने कहा कि तुम तो खुद इतने छोटे हो, मेरी मदद क्या करोगे। चूहे की विनती सुनकर शेर को उस पर दया आ गई और उसने चूहे को छोड़ दिया। चूहे ने शेर को धन्यवाद बोला और वहां से चला गया।

कुछ दिनों बाद जब शेर खाने की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था, तभी अचानक किसी शिकारी के फैलाए जाल में फंस गया। शेर ने खुद को जाल से निकालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन निकल नहीं पाया। काफी देर कोशिश करने के बाद शेर ने मदद के लिए दहाड़ लगानी शुरू की।

उसी वक्त वो चूहा उधर से गुजर रहा था कि उसने शेर की दहाड़ने की आवाज सुनी। वो भागकर शेर के पास गया और शेर को जाल में फंसा देख चौंक गया। उसने बिना देर करते हुए अपने नुकीले दांतों से जाल को काटना शुरू किया और कुछ ही देर में उसने पूरे जाल को काटकर शेर को आजाद कर दिया। चूहे की इस मदद से शेर की आंखें भर आईं और नम आंखों से शेर ने चूहे को धन्यवाद किया और दोनों वहां से चले गए। फिर शेर और चूहा अच्छे दोस्त बन गए।

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें सिर्फ शरीर के आधार पर किसी इंसान को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए। साथ ही हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए, क्योंकि जब हम दूसरों की मदद करेंगे, तभी कोई हमारी मदद के लिए आगे आएगा।

एक घमंडी हाथी और चींटी की कहानी | Ghamandi Hathi Aaur Chiti Ki Kahani

एक बार की बात है। किसी जंगल में एक हाथी रहता था। उसे अपने शरीर और अपनी ताकत का बहुत घमंड था। उसे रास्ते में जो भी जानवर मिलता, वो उसे परेशान करता और डरा कर भगा देता।

एक दिन वह कहीं जा रहा था। रास्ते में उसने एक पेड़ पर एक तोते को बैठा देखा और उससे अपने सामने झुकने के लिए बोला।

तोते ने झुकने से मना कर दिया, तो गुस्से में आकर हाथी ने वो पेड़ ही उखाड़ दिया, जिस पर तोता बैठा था। तोता उड़ गया और हाथी उसे देख कर हंसने लगा।

फिर एक दिन हाथी नदी के किनारे पानी पीने के लिए गया। वहीं पर चींटियों का छोटा-सा घर था।

एक चींटी बड़ी मेहनत से अपने लिए खाना इकट्ठा कर रही थी। यह देख हाथी ने पूछा कि तुम क्या कर रही हो, तो चींटी ने कहा कि बरसात का मौसम आने से पहले अपने लिए भोजन जमा कर रहीं हूं, ताकि बारिश का मौसम बिना किसी परेशानी से निकल जाए। यह सुन कर हाथी के मन में शरारत सूझी और उसने अपनी सूंड़ में पानी भर कर चींटी के ऊपर डाल दिया।

पानी से चींटी का भोजन खराब हो गया और वो पूरी भीग गई। यह देखकर चींटी को बहुत गुस्सा आया और उसने घमंडी हाथी को सबक सिखाने का सोचा। फिर एक दिन चींटी को मौका मिल ही गया कि वो हाथी को सबक सिखा सके। हाथी भोजन करके हरी घास पर सो रहा था।

चींटी सोते हुए हाथी की सूंड़ में घुस गई और अंदर से उसे काटने लगी। जैसे ही चींटी ने हाथी को काटा, हाथी दर्द के मारे जोर जोर से रोने लगा और मदद के लिए पुकारने लगा।

चींटी ने हाथी के रोने की आवाज सुनी और सूंड़ से बाहर निकल आई। हाथी उसे देख कर डर गया और अपने किए की माफी मांगी। जब चींटी को महसूस हुआ कि हाथी को अपनी गलती का अहसास हो गया है, तो उसने हाथी को माफ कर दिया। हाथी अब बिलकुल बदल गया और उसने वादा किया कि अब वो किसी को नहीं सताएगा और दूसरों की मदद करेगा।

कहानी से सीख

हमें अपनी ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। अपनी ताकत के जोर पर दूसरों को परेशान करने की जगह उनकी मदद करनी चाहिए। 

बुद्धिमान बंदर और मगरमच्छ की कहानी | Magarmach Aur Bandar Ki Kahani

एक था घना जंगल, जहां जानवर एक दूसरे के साथ बहुत प्यार से रहा करते थे। उस जंगल के बीच एक बहुत सुंदर और बड़ा तालाब था। उस तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। तालाब के चारों ओर बहुत सारे फलों के पेड़ लगे हुए थे। उनमें से एक पेड़ पर बंदर रहता था। बंदर और मगरमच्छ एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे।

बंदर पेड़ से मीठे और स्वादिष्ट फल खाता था और साथ ही अपने दोस्त मगर को भी देता था। बंदर अपने दोस्त मगर का खास ख्याल रखता और मगर भी उसे अपनी पीठ पर बैठाकर पूरे तालाब में घुमाता था।

दिन निकलते गए और दोनों की दोस्ती गहरी होती गई। बंदर जो फल मगरमच्छ को देता था, मगरमच्छ उनमें से कुछ फल अपनी पत्नी को भी खिलाता था। दोनों फलों को बड़े ही चाव से खाते थे।

बहुत दिनों के बाद एक बार मगर की पत्नी ने कहा कि बंदर तो हमेशा ही स्वादिष्ट फल खाता रहता है। जरा सोचो उसका कलेजा कितना स्वादिष्ट होगा। वह मगर से जिद करने लगी कि उसे बंदर का कलेजा खाना है।

मगर ने उसे समझाने कि कोशिश की, लेकिन उसने नहीं माना और वो मगर से रूठ गई। अब मगर को न चाहते हुए भी हां बोलना पड़ा। उसने कहा कि वो दूसरे दिन बंदर को अपनी गुफा में लेकर आ जाएगा, तब उसका कलेजा निकालकर खा लेना। इसके बाद मगर की पत्नी मान गई।

हर दिन की तरह स्वादिष्ट फलों के साथ बंदर मगर का इंतजार करने लगा। कुछ ही देर में मगर भी आ गया और दोनों ने मिलकर फल खाए। मगरमच्छ बोला कि दोस्त आज तुम्हारी भाभी तुमसे मिलना चाहती है। चलो तालाब की दूसरी ओर मेरा घर है, आज वहां चलते हैं।

बंदर झट से मान गया और उछलकर मगर की पीठ पर बैठ गया। मगर उसे लेकर अपनी गुफा की ओर बढ़ने लगा। जैसे ही दोनों तालाब के बीच पहुंचे, मगर ने कहा कि मित्र आज तुम्हारी भाभी की इच्छा है कि वो तुम्हारा कलेजा खाये। ऐसा कहकर उसने पूरी बात बताई।

बात सुनकर बंदर कुछ सोचने लगा और बोला मित्र तुमने मुझे यह पहले क्यों नहीं बताया। मगर ने पूछा क्यों मित्र क्या हाे गया। बंदर बोला कि मैं अपना कलेजा तो पेड़ पर ही छोड़ आ हूं। तुम मुझे वापस ले चलो तो मैं अपना कलेजा साथ में ले आऊंगा।

मगर बंदर की बातों में आ गया और वापस किनारे पर आ गया। वो दोनों जैसे ही किनारे पर पहुंचे बंदर झट से पेड़ पर चढ़ गया और बोला कि मूर्ख तुझे पता नहीं कि कलेजा हमारे अंदर ही होता है। मैं हमेशा ही तुम्हारा भला सोचता रहा और तुम मुझे ही खाने चले थे। कैसी मित्रता है यह तुम्हारी। चले जाओ यहां से।

मगर अपनी करनी पर बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने बंदर से माफी मांगी, लेकिन अब बंदर उसकी बातों में नहीं आने वाला था।

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि संकट के समय हमें घबराना नहीं चाहिए। मुसीबत के समय अपनी बुद्धि का उपयोग कर उसे दूर करने का उपाय सोचना चाहिए।

तीन मछलियों की कहानी | Teen Machli Ki Kahani

एक समय की बात है, एक घने जंगल के अंदर बड़ा-सा तालाब था। उस तालाब में बहुत सारी मछलियां रहती थीं, जिनमें से तीन मछलियां एक-दूसरे की पक्की दोस्ती थीं। इन तीनों का स्वभाव बिलकुल अलग था।

इनमें से दो बहुत समझदार थीं। पहली संकट आने के पहले ही अपना बचाव कर लेती थी। दूसरी संकट आने पर अपनी सुरक्षा कर लेती थी, जबकि तीसरी सब कुछ भाग्य पर छोड़ देती थी। तीसरी मछली कहती कि अगर भाग्य में संकट होगा, तो हम कुछ नहीं कर सकते और भाग्य में नहीं होगा, तो कोई भी हमारा कुछ नहीं कर सकता।

एक दिन रास्ते से गुजर रहे एक मछुआरे ने उस तालाब को देख लिया। उसने देखा कि तालाब मछलियों से भरा पड़ा है। उसने तुरंत अपने बाकी साथियों को इस बारे में बताया। मछुआरे और उसके साथियों ने अगली सुबह यहां आने और उन मछलियों को पकड़ने का फैसला किया, लेकिन मछली ने मछुआरे और उसके साथियों के बीच की बातचीत सुन ली थी। उसने तुरंत तलाब में रहने वाली सभी मछलियों को इकट्ठा किया और सारी बात बता दी। पहली मछली बोली कि हो सकता है कि कल मछुआरे आकर हमें जाल में पकड़ कर ले जाएं। उससे पहले ही हमें यह स्थान छोड़ देना चाहिए।

तभी तीसरे नंबर की मछली बोली कि अगर वो कल नहीं आए तो? यह हमारा घर है, हम कैसे इसे छोड़ कर जा सकते हैं। अगर भाग्य में लिखा होगा, तो हम कहीं भी हों मारे जाएंगे और नहीं लिखा होगा, तो हमें कुछ नहीं होगा। कुछ मछलियों ने तीसरे नंबर की मछली की बात मान ली और वहीं रुक गईं।

अन्य दो मछलियां तीसरी मछली को समझाने में असमर्थ थीं, इसलिए उन्होंने बाकी मछलियों के साथ तालाब छोड़ दिया।

अगले दिन, मछुआरे और उसके साथियों ने अपना जाल डाला। जो मछलियां रह गईं थीं वे सभी पकड़ी गईं।

जो मछलियां भाग गईं थीं उन सभी की जान बच गई और जो तालाब में रुक गईं थी वे सभी मछुआरों के द्वारा पकड़ ली गईं। मछुआरे ने उन्हें एक टोकरे में डाल दिया, जहां सभी तड़प तड़प के मर गईं।

कहानी से सीख : हमें कभी भी भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए। संकट आने के पहले ही उसे दूर करने का उपाय सोचकर रखना चाहिए। 

बैल और शेर की कहानी | Lion And Three Bulls Story In Hindi

एक जंगल में तीन बैल रहा करते थे। तीनों आपस में अच्छे मित्र थे। वो घास चरने के लिए जंगल में एक साथ ही जाया करते थे। उसी जंगल में एक खूंखार शेर भी रहता था। इस शेर की कई दिनों से इन तीनों बैल पर नजर थी। वह इन तीनों को मारकर खा जाना चाहता था। उसने कई बार बैलों पर आक्रमण भी किया, लेकिन बैलों की आपसी मित्रता के कारण वो कभी सफल नहीं हो पाया। जब शेर उन पर हमला करता था, तो तीनों बैल त्रिकोण बनाकर अपने नुकीले सींगों से अपनी रक्षा करते थे।

तीनों बैल साथ मिलकर कई बार शेर को भगा चुके थे, लेकिन शेर कैसे भी करके उन तीनों को खाना चाहता था। शेर यह समझ गया था कि जब तक ये तीनों साथ रहेंगे, इन्हें मारा नहीं जा सकता है। इसलिए, उसने एक दिन इन तीनों को अलग करने के लिए एक चाल चली।

शेर ने बैलों को अलग करने के लिए जंगल में एक अफवाह उड़ा दी। अफवाह यह थी कि इन तीनों बैलों में से एक बैल अपने साथियों को धोखा दे रहा है। बस फिर क्या था, बैलों के बीच इस बात को लेकर शक बैठ गया कि आखिर वो कौन है, जो हमें धोखा दे रहा है?
एक दिन इसी बात को लेकर तीनों बैलों में झगड़ा हो गया। शेर ने जो सोचा था, वो हो गया था। अब तीनों बैल अलग-अलग रहने लगे थे। उनकी दोस्ती टूट चुकी थी। अब वो अलग-अलग होकर जंगल में चरने जाने लगे थे। बस शेर को इसी मौके का इंतजार था।

शेर ने एक दिन उन तीनों बैलों में से एक पर हमला बोल दिया। अकेले पड़ जाने की वजह से वह बैल शेर का मुकाबला नहीं कर पाया और शेर ने उसे मार डाला। कुछ दिनों के बाद शेर ने दूसरे बैल पर भी हमला कर दिया और उसे मारकर खा गया। अब सिर्फ एक बैल बचा था। वह समझ गया था कि शेर अब उसको भी मार डालेगा। उसके पास बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। वह अकेले शेर का मुकाबला नहीं कर सकता था। एक दिन जब वह जंगल में घास चरने गया था, तो शेर ने उसे भी अपना शिकार बना लिया। शेर की चाल पूरी तरह कामयाब हुई और उसने तीनों बैलों की दोस्ती तोड़कर उन्हें अपना शिकार बना लिया था।

कहानी से सीख : एकता में बड़ी ताकत होती है। हमें हमेशा आपस में मिलकर रहना चाहिए और दूसरों की बातों में नहीं आना चाहिए।