08 March 2022

भूतिया कुआं | Bhootiya Kuan Story In Hindi

Bhootiya Kuan Story In Hindi

केशवपुर गांव में अधिकतर लोग खेती करने वाले ही थे। पूरे गांव में सिर्फ दो ही कुएं थे, जिनसे लोगों को पानी मिलता था। कुछ समय बाद गांव का एक कुआं पूरी तरह सूख गया। अब पूरे गांव के लोग पानी की जरूरत के लिए एक ही कुएं पर निर्भर थे।

दूसरे कुएं से पानी भरते-भरते लोगों को लगा कि कुएं में कोई भूत रहता है। जब गांव के किसान कुएं से पानी भरते थे, तो उन्हें अजीब सी आवाजें सुनाई देती थीं। खेती करने वाले पुरुषों की पत्नियां तो डर के मारे कुएं के आसपास भी नहीं आती थीं। धीरे-धीरे पूरे गांव में बात फैल गई कि कुआं भूतिया है। अब रात के समय कोई भी कुएं के पास नहीं जाता था।

इसी बीच गांव का एक बच्चा कहीं खो गया। काफी ढूंढने के बाद भी बच्चा जब नहीं मिला, तो कुछ लोग कुएं के पास बच्चे को देखने के लिए गए। वहां पहुंचे लोगों ने बच्चे को कुएं के अंदर मरा हुआ पाया। अब एक तो कुएं का पानी खराब हो गया और दूसरा बच्चा कैसे मरा इसको लेकर गांव के सभी किसान परेशान हो गए थे।

सबने एक दिन मिलकर नया कुआं खोदने की सोची। कुछ ही दिनों में कुआं सबने खोद लिया और उसमें पानी भी आने लगा। अब पूरे गांव के लोग नए कुएं से ही पानी भरते थे और भूतिया कुएं की तरफ जाना सबने बंद कर दिया था। बड़े लोग तो समझदार थे, इसलिए कुएं के आसपास नहीं जाते थे, लेकिन बच्चे वहां अक्सर खेलने के लिए पहुंच जाते थे।

एक दिन चार-पांच बच्चे भूतिया कुएं के पास खेल रहे थे, तभी एक बच्चा कुएं में गिर गया। उसके चीखने की आवाज सुनकर पूरे गांव वाले दौड़ते हुए भूतिया कुएं के पास पहुंचे। उन्होंने कुएं के अंदर देखा तो बच्चा मरा हुआ दिखा। सबने उस बच्चे के साथ खेल रहे दूसरे बच्चों से पूछा, “आखिर क्या हुआ था?”

बच्चों ने कहा, “वो खेलते-खेलते पानी को देखने गया और अचानक कुएं में गिर पड़ा।”

इस हादसे के बाद गांव वालों ने तुरंत एक तांत्रिक को जाकर कुएं के पास बुलाया। वहां पहुंचकर तांत्रिक ने बहुत सारे मंत्र पढ़े, जिसे सुनकर भूत सबके सामने आ गया। तांत्रिक ने अपनी विद्या का इस्तेमाल करके उस कुएं को छोड़कर जाने के लिए कहा।

भूत ने तांत्रिक की बात को मानने से इनकार कर दिया।

तांत्रिक ने पूछा, “तुम क्यों नहीं जाओगे? यहां आकर बच्चे मर रहे हैं, इसलिए तुम्हें जाना ही होगा।

भूत ने जवाब दिया, “इस कुएं में सालों से मेरा पूरा खानदान रहता आ रहा है। मैं यहां से बिल्कुल नहीं जाऊंगा। इतना कहकर भूत कुएं के अंदर चला गया।”

अब तांत्रिक ने गांव के लोगों से कहा, “इस कुएं के मुंह को ढक दो। ऐसा करने से किसी तरह के हादसे नहीं होंगे।”

ये सुनते ही गांव के मुखिया ने तुरंत काम शुरू करवा दिया। दूसरे दिन कुएं के मुंह पर जाली डालकर पूरी तरह से रेत और सीमेंट से पक्का ढक्कन बना दिया गया और उसे ढक दिया गया। अब सारे गांव वाले खुशी-खुशी रहने लगे। उस दिन के बाद से गांव में ऐसी किसी तरह की घटना नहीं हुई और भूतिया कुएं के डर से लोग मुक्त हो गए।

कहानी से सीख :

किसी भी परेशानी में हार नहीं माननी चाहिए। किसी-न-किसी तरीके से उस परेशानी से बाहर निकला जा सकता है।

भूत का भय | Bhoot Ka Bhay Story In Hindi

Bhoot Ka Bhay Story In Hindi

उत्तर प्रदेश के एक पीरगढ़ गांव में अब्दुल व उसके कुछ दोस्त रहते थे। एक दिन ऐसे ही उन सभी के बीच भूत की बात छिड़ गई। इस दौरान अब्दुल ने बिना डरे कह दिया कि भूत जैसा कुछ नहीं होता। तभी सभी दोस्तों ने उससे कहा कि ऐसा है तो क्या तुम इस बात को साबित कर सकते हो कि तुम्हें भूत से डर नहीं लगता। उसने कह दिया, “हां, बिल्कुल।”

गांव में इस दौरान ऐसी बातें चल रही थीं कि पास के ही श्मशान घाट में लोगों को भूत नजर आता है। तभी एक दोस्त ने कहा कि ठीक है, तो तुम रात को श्मशान घाट जाओ और वहां जाकर कील गाड़कर आ जाना। फिर सुबह सब मिलकर उस कील को देखकर आएंगे। इतना तय होने के बाद अब्दुल श्मशान घाट के लिए निकल गया। रात काफी काली थी, क्योंकि वो दिन आमावस्या का था। रास्ते में चलते हुए अब्दुल के दिमाग में भूत की बातें घूमने लगी। उसे डर भी लग रहा था, लेकिन दोस्तों के सामने हंसी होगी ऐसा सोचकर वो आगे बढ़ता रहा और श्मशान घाट पहुंच गया।

वहां पहुंचते ही अब्दुल ने कील को गाड़ने के लिए जेब से हथौड़ी निकाली और कील को जमीन में धीरे-धीरे गाड़ने लगा। शोर ज्यादा न करने के चक्कर में अब्दुल काफी आराम से कील गाड़ रहा था। कुछ देर बाद उसे लगा कि कोई उसका कुर्ता खींच रहा है। उसका पूरा शरीर ठंडा पड़ गया और वो बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा।

तभी अब्दुल का पीछा करते हुए श्मशान पहुंचे उसके दोस्तों ने उसे उठाया और गांव लेकर आ गए। काफी देर तक जब अब्दुल को होश नहीं आया, तो उसपर पानी के छींटे मारे। उतने में ही अब्दुल को होश आ गया और उसने बताया कि वो कील श्मशान में गाड़ चुका था, लेकिन तभी कोई उसका कुर्ता खींचने लगा, जिससे वो डर गया।

दोस्तों ने अब्दुल को बताया कि कोई उसका कुर्ता नहीं खींच रहा था। अब्दुल ने पूछा, “तो क्या हुआ था?”

तब उसके दोस्तों ने बताया कि जिस कील को जमीन में वो गाड़ रहा था उसी के नीचे कुर्ता भी दब गया था। इसी वजह से उसे लगा कि कोई उसका कुर्ता खींच रहा है। अपने डर की वजह से शर्मिंदा होते हुए अब्दुल ने अपने दोस्तों से माफी मांगी, लेकिन उसके सारे दोस्तों ने मिलकर उसकी हिम्मत की खूब तारीफ की।

कहानी से सीख :

आप जितना डरेंगे, आपको डर उतना डराएगा।

उल्लू और भूतों के सरदार का सपना | Ullu Or Bhooton Ke Sardar Ka Sapna Story In Hindi

Ullu Or Bhooton Ke Sardar Ka Sapna Story In Hindi

दिनकर नामक जंगल में एक पुराना-सा बरगद का पेड़ हुआ करता था, जिसमें उल्लू का घर भी था। उसी पेड़ के नीचे एक हाथी भी रहता था, जिसका नाम झनकू था। एक जगह पर रहने की वजह से उल्लू और झनकू हाथी के बीच अच्छी दोस्ती थी।

इधर, हाथी सारा दिन जंगल में मस्ती करता था। कभी वो गन्ने खाता, तो कभी अपनी सूंड में पानी भरता और अपने ऊपर फेंकता। उधर, उल्लू सारा दिन सोता और रात होते ही झनकू के पास जाकर ढेर सारी बातें करता था। ऐसे ही दोनों का समय अच्छे से कट जाता था।

एक दिन हाथी घूमकर शाम के समय बरगद के पेड़ के पास लौट रहा था, तभी उसने कुछ भूतों को बातें करते हुए देखा। उसने सुना कि भूत आसपास के लोगों को डराना की सोच रहे हैं।

उसी वक्त भूतों के सरदार ने झनकू को देख लिया। वो जोर से चिल्लाया पकड़ लो इस हाथी को। कुछ भूत झनकू को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागने लगे।

भूतों के सरदार के पास खड़े कुछ भूतों ने पूछा, “ये कौन था सरदार।”

सरदार ने जवाब दिया, “मैंने कल रात सपने में एक हाथी को पूरा खाया था। ये हाथी बिल्कुल मेरे सपने के हाथी जैसा ही था। इसे देखकर लग रहा है कि सपने सच हो सकते हैं। इसे पकड़कर आज मैं अपना सपना सच करके ही रहूंगा। ”

तभी हाथी को भूत पकड़कर सरदार के पास ले आए। झनकू ने पहली बार भूतों को देखा था। उन्हें देखकर वो डर गया। कांपते हुए झनकू हाथी की तरफ भूतों का सरदार अपना सपना सच करने के लिए बढ़ने लगा। झनकू के हाथ-पैर ठंडे पड़ चुके थे। ताकत तो झनकू के पास काफी थी, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि भूतों से कैसे निपटे।

उसी समय झनकू का दोस्त उल्लू वहां पहुंचा। चिल्लाते हुए उल्लू हाथी के सिर पर बैठ गया और कहने लगा, “आज मेरा सपना पूरा होगा। यही है वो जिसे मैंने अपने सपने में देखा था। हां, यही है वो।”

उल्लू की ऐसी बातें सुन भूतों के सरदार ने पूछा, “अरे! क्या हुआ है तुम्हें? क्यों चिल्ला रहे हो और क्या कहना चाहते हो? कौन यही और कौन सा सपना?”

जवाब में उल्लू ने कहा कि देखिए मैंने कल रात सपना देखा था कि मेरी शादी हो गई है। मैंने जिसे अपने सपने में देखा था उसका चेहरा आपके बगल में जो खड़ी है उससे मिलता है। अब मैं इससे विवाह करके अपना सपना पूरा करूंगा।

तभी उल्लू सरदार ने बताया कि वो भूतों की रानी है और तुम्हारा ये सपना सच नहीं हो सकता है।

उसी वक्त भूतों की रानी भी चिल्लाते हुए कहने लगी कि मैं एक उल्लू से शादी कभी भी नहीं करूंगी।

भूतों के सरदार ने उस रानी से कहा कि चिंता करने की कोई बात नहीं है। यह है ही उल्लू, इसलिए ऐसी बातें कह रहा है। सपने सच थोड़ी होते हैं। मैंने पिछली रात को सपने में इस हाथी को खा लिया था। सच में थोड़ी मैं इसे खाऊंगा, क्योंकि सपने सच नहीं होते हैं। सपनों को सपना ही रहने देना चाहिए।

इतनी बात सुनते ही झनकू तेजी से अपने बरगद के पेड़ की तरफ भाग गया।

हाथी के वहां से जाते ही उल्लू ने भूतों के सरदार से कहा, “आप लगते तो हैं उल्लू ही, लेकिन बातें और काम समझदारी की ही करते हैं। मुझे अच्छा लगा आपकी बातें सुनकर।”

इतना कहकर उल्लू वहां से उड़कर बरगद के पेड़ पर पहुंच गया।

अपने दोस्त उल्लू को देखते ही हाथी ने उसे धन्यवाद कहा और उल्लू जोर-जोर से हंसने लगा।

हाथी ने पूछा क्या हुआ, “उल्लू ने कहा कि मैंने भूत की बातें सुन ली थी। वो तुम्हें अपने सपने की वजह से खाना चाहता था, इसलिए मैंने भी उसे झूठा सपना सुनाकर बेवकूफ बना दिया।”

फिर उल्लू ने हाथी से कहा कि दोस्त! तुम्हें न तो मुझे धन्यवाद कहने की जरूरत है और न ही उससे डरने की। दोस्ती में धन्यवाद की जगह नहीं होती है।

तब कहीं जाकर हाथी को राहत की सांस आई और दोनों दोस्त मिलकर भूतों के सरदार की नासमझी पर हंसने लगे।

कहानी से सीख :

दोस्ती अगर सच्ची हो तो, वो हर मसुबित में आपके साथ खड़े रहते हैं।

भूत नाशक बाबा | Bhoot Nasak Baba Story In Hindi

Bhoot Nasak Baba Story In Hindi

सालों पहले माधोपुर और श्यामपुर के जंगल तक भूत-प्रेत की कहानियां फैली हुई थी। पास के ही गांव के लोग इन्हीं जंगलों में अपने जानवर चराते थे, लेकिन भूत के डर से शाम होने से पहले लौट जाते थे। एक दिन राजीव भी उसी जंगल में अपनी बकरियों के लिए घास लेने के लिए गया था।

अक्सर काम से जी-चुराने वाला राजीव मजबूरी में जंगल आया था, इसलिए उसका मन घास काटने का बिल्कुल भी नहीं था। जंगल में आसपास उसने देखा कि घास नहीं है, क्योंकि सारी गाय-बकरी घास खा गई थी। अब वो मरे मन से आगे बढ़ने लगा। जाते-जाते वो करीब जंगल के बीच में पहुंच गया था। वहां काफी हरी घास और पत्तों से लदे हुए पेड़ थे। पास में ही झरना भी बह रहा था। ये सब देखकर राजीव को और आलस आ गया। उसने सोचा कि कुछ देर पत्थरों पर बैठकर आराम कर लेता हूं।

लेटते ही राजीव गहरी नींद में चला गया और सपने देखने लगा। सपने में ही राजीव जंगल का रास्ता भूल गया था और उसने एक अजीब से आदमी को भी देखा। आदमी की शक्ल इतनी डरावनी थी कि राजीव की नींद खुल गई। डरा हुआ राजीव एकदम उठा और बकरियों के लिए घास काटने लगा। भले ही वो घास काट रहा था, लेकिन उसके जहन से सपने वाले उस डरावने इंसान की शक्ल जा ही नहीं रही थी।

राजीव घास जल्दी-जल्दी काट रहा था, क्योंकि सूरज लगभग ढलने ही वाला था। उसने कुछ देर बाद दो लोगों की आवाज सुनी। वो दौड़ता हुआ उस आवाज की तरफ बढ़ने लगा। उनके पास पहुंचकर राजीव कहने लगा कि मुझे मेरे गांव जाने का रास्ता बता दीजिए। उसकी बात सुनते ही वो दोनों वहां से एकदम गायब हो गए। उन्हें एकदमम से गायब होता देख हैरान राजीव बेहोश हो गया।

कुछ देर बाद जब राजीव को होश आया, तो उसने अपने सामने वही सपने वाला डरावना आदमी देखा। उसी आंखें  लाल रंग की थी और दांत बाहर को निकले हुए। किसी तरह से खुद को संभालकर राजीव वहां से पागलों की तरह दौड़ने लगा। उसी वक्त एक भालू उससे टकरा गया। उसने ऐसा झपटा मारा राजीव पर कि वो नीचे गिर गया। तभी भालू भी आदमी की शक्ल में आ गया। वो भी अजीब और डरावना था। हाथ टेढ़े-मेड़े, होंठ कटे हुए और पैर उल्टे थे।

इधर, जंगल में फंसे राजीव को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है। उधर, उसके घर वाले परेशान हो रहे थे। रात के दस बज चुके थे, लेकिन राजीव घर नहीं लौटा था। उसका भाई उसे ढूंढने के लिए जंगल की तरफ निकल गया। राजीव का भाई एक पैर से ठीक से चल नहीं पाता था, इसलिए मदद के लिए उसके माता-पिता के साथ ही गांव के कुछ लोग भी निकल पड़े।

जंगल पहुंचने के बाद सबने राजीव के भाई और मां को जंगल के बाहर के हिस्से में ही रूकने के लिए कहा और खुद टॉर्च और कुछ हथियार लेकर अंदर चले गए। करीब तीन से चार घंटे तक सबने जंगल के चारों ओर उसे ढूंढा, लेकिन वो कहीं नहीं मिला। बस अब जंगल का अंदरुनी और घना हिस्सा ही बचा था। रात के चार बज रहे थे, इसलिए सबने सुबह होने का इंतजार करने का फैसला लिया और कुछ देर जंगल में ही बैठ गए।

सुबह होते ही सब आगे बढ़े और राजीव की तलाश शुरू की, लेकिन वो कहीं भी नहीं मिला। सब थक हारकर अपने-अपने घर लौट आए। राजीव किसी एक कोने में भूख-प्यास से तड़पता हुआ पड़ा था। उसे इतना होश भी नहीं था कि वो कहा है।

राजीव का परिवार भी तीन दिन से उसकी याद में परेशान थे। राजीव के भाई के मन में हुआ कि वो पक्का कहीं मुसीबत में ही होगा। अब मुझे भगवान को याद करना चाहिए। उसने तुरंत नीम के पेड़ के नीचे गड्ढा खोदना शुरू कर दिया। भाई लौटेगा-भाई लौटेगा कहते-कहते किसी तरह से उसने गड्ढा खोद लिया। अब रोज सुबह वह उस गड्ढे में जल और दूध चढ़ाता था। उसका मानना था कि उनके देवता उसी नीम के नीचे ही रहते हैं।

वो रोज सुबह उसी पेड़ के पास बैठ जाता और उसे कोई भी उठाने के लिए आता, तो उसे धक्का मार देता था। नीम के पेड़ के नीचे बैठकर राजीव का भाई बस यही कहता था कि मेरा भाई आएगा। उसे मेरे भगवान लेकर आएंगे। राजीव के न मिलने और उसके बड़े भाई की ऐसी हालत देखकर गांव वालों ने एक भगत को बुलाया। उन्होंने कुछ देर ध्यान लगाकर सबको बताया कि राजीव जिंदा है और वो कल घर आ जाएगा। उसकी मदद करने के लिए खुद भगवान जा रहे हैं।

कुछ दिनों बाद राजीव किसी की साइकिल में बैठकर घर सही सलामत लौटकर आ गया। उसका शरीर इतना कमजोर था कि उसे अस्पतल में भर्ती करना पड़ा। करीब तीन बाद उसकी तबीयत ठीक हो गई। अब राजीव के भाई ने पूछा कि तुम्हें क्या हुआ था और किस तरह से तुम बचे?

राजीव ने बताया कि उसे जंगल में भूतों ने घेर कर रखा हुआ था। वो ऐसे खतरनाक दिखते थे कि याद करते ही डर लगता है। आवाजें भी अजीब-अजीब सी निकालकर मेरे चारों तरफ नाचते रहते थे। मुझे लगता था कि मैं कभी बच नहीं पाऊंगा उन भूतों से, लेकिन भगवान से खुद को बचाने की मिन्नते भी करता था। तभी ऐसा लगा मानो भगवान ने उसकी पुकार सुन ली हो।

उस दिन घोड़े के पैरों की आहट और उसके हिनहिनाने की आवाज आई। सभी भूत ये सुनकर शांत हो गए। घोड़े पर एक आदमी भी सवार था। उसके हाथों में तलवार थी। उसे देखते ही सारे भूत भागने लगे। वो अपनी तलवार से एक-एक को मारते हुए आगे बढ़ रहे थे। फिर उस घुड़सवार ने मेरी तरफ देखते हुए कहा कि मैं तुम्हारे लिए ही आया हूं। अब किसी तरह की चिंता मत करना। सुबह होते ही तुम्हें कोई-न-कोई लेने आ जाएगा, अभी तुम आराम करो।

राजीव ने आगे कहा कि उनकी इतनी बात से ही दिल को सुकून मिल गया था। वहां से सारे भूत भी भाग चुके थे, इसलिए मैं बिना किसी डर के सो गया। सुबह जैसे ही मेरी आंख खुली, तो वहां एक साइकिल वाला इंसान था। उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाकर कहा कि तुम्हारा घर कहा है बता दो, मैं तुम्हें वहां पहुंचा दूंगा। उसके बाद वो मुझे घर ले आया।

कहानी से सीख :

भगवान पर अटल विश्वास हो, तो वो भक्त की मदद करने के लिए किसी-न-किसी रूप में जरूर आते हैं।

डायनासोर की गुफा  | Dinosaur Ka Gupha Story In Hindi

Dinosaur Ka Gupha Story In Hindi

सालों पहले मिमसपुर गांव में एक डरावना और उड़ने वाला डायनासोर रहता था। उस गांव में डायनासोर की गुफा भी थी, जहां डायनासोर अक्सर आता-जाता था। वह डायनासोर इतना खतरनाक था कि उसके मुंह से आग भी निकलती थी। हर महीने वो डायनासोर गांव में उड़ते हुए मुंह से आग निकालकर गांव के कई घरों को जला देता था।

ऐसे ही हर महीने उस गांव के कई घर और खेत जलकर राख हो जाते थे। हर तरफ उस डायनासोर का डर था। अपने गांव के लोगों को इतना परेशान देखकर राजा ने उस डायनासोर को मारने का फैसला लिया। उन्होंने उसकी गुफा में 10 से 12 सैनिक भेजे। कुछ सैनिकों ने जैसे ही डायनासोर पर चाकू से हमला किया, तो वैसे ही डायनासोर नींद से जग गया और सारे सैनिकों को मार दिया।

राजा जितनी बार भी सैनिकों को गुफा में भेजते, वो डायनासोर मुंह से आग निकालकर सभी को खत्म कर देता। इस सबसे परेशान होकर राजा ने गांव में घोषणा कर दी कि जो भी उस खतरनाक डायनासोर को मारेगा उसे वो दस हजार सोने की मोहर देंगे।

उसी गांव में एक काफी बुद्धिमान व्यक्ति भी रहता था। उसने जैसे ही यह एलान सुना, तो राजा को डायनासोर के आतंक से बचने का उपाय बता दिया। उसने कहा कि हम लोहे को पिघला लेते हैं और उससे बनने वाले लार्वे को डायनासोर पर डाल देंगे। गर्म लार्वे से बचने के लिए जैसे ही डायनासोर उड़ने लगेगा, तो पत्थरों से टकरा जाएगा और उन्हीं के नीचे दबकर उसकी जान निकल जाएगी।

राजा को उसका यह सुझाव अच्छा लगा। उन्होंने अपने सैनिकों को कहकर तुरंत लार्वा तैयार करवाया और सैनिकों के साथ डायनासोर की गुफा में पहुंच गए। फिर ठीक वैसा ही किया जैसा उस बुद्धिमान व्यक्ति ने राजा को करने के लिए कहा था। डायनासोर पर लार्वा जैसे ही गिरा वो इधर-उधर देखे बिना झटके से उड़ने लगा और गुफा से टकरा गया। इसी बीच गुफा के ऊपर के पत्थर उसके ऊपर गिरने लगे और वो उन्हीं के नीचे दबकर मर गया।

ऐसा होते ही राजा और पूरे गांव को राहत मिली और राजा ने इस तरकीब को सुझाने वाले व्यक्ति को दस हजार सोने की मोहर इनाम में दे दीं और अपने यहां मंत्री के पद पर भी उसे नियुक्त कर लिया।

कहानी से सीख : बुद्धि से मुश्किल से मुश्किल कार्य को भी पूरा किया जा सकता है।

सच में भूत आया | Sach Main Bhoot Aaya Story In Hindi

Sach Main Bhoot Aaya Story In Hindi

सालों पहले की बात है एक लड़का किसी कंपनी में मैनेजर था। उसके साथ कभी कोई भूत की कुछ डरावनी बातें करता था, तो उसे डर नहीं लगता था। उसका कहना था कि भूत जैसा कुछ होता ही नहीं है। यह सब लोगों के दिमाग का वहम है।

एक दिन ऑफिस में ज्यादा काम था, जिस वजह से वो घर रात को लौट रहा था। बाइक से आराम से रात को घर जाते-जाते अचानक एक सुनसान सड़क पर उसकी गाड़ी खराब हो गई। रात का समय था कोई गाड़ी ठीक करने वाला नहीं मिलेगा सोचते हुए वो अपनी बाइक को खींचते हुए पैदल चलने लगा।

कुछ ही दूर पहुंचा था कि उसे एक बस स्टॉप के पास कोई फकीर बैठा हुआ दिख गया। काफी देर से बाइक खींच रहे लड़के ने भी सोचा थोड़ी देर इधर ही इंतजार कर लेता हूं। वो सीधे फकीर के पास चला गया और बैठकर उससे बातें करने लगा। दोनों के बीच करीब दस मिनट तक बात हुई और उसी वक्त भूतों का जिक्र भी आ गया।

हंसते हुए लड़के ने कहा कि भूत जैसा कुछ नहीं होता है और न ही मैं इन्हें मानता हूं। ये सारी झूठी और वहम वाली बातें हैं।

फकीर ने लड़के की तरफ हैरानी से देखा और बोला, “तुम भूत को नहीं मानते हो, वो एक अलग बात है। अगर तुम ऐसा कहोगे कि भूत होते ही नहीं है, तो यह सरासर गलत है।”

लड़का फिर हंसा और पूछने लगा कि भूत होते हैं, तो दिखते क्यों नहीं हैं? क्या आपने कभी भूत देखा है? क्या आप मुझे दिखाएंगे एक भी भूत?

फकीर के मन में हुआ कि इसे आज भूत दिखा ही देता हूं। उसने लड़के को अपने पीछे चलते रहने के लिए कहा और आगे श्मशान की ओर बढ़ गया।

सुनसान रास्ते में दोनों पैदल चल रहे थे। अब लड़के को थोड़ा डर लगने लगा, लेकिन हिम्मत करते हुए वो आगे बढ़ा। कुछ ही देर में दोनों श्मशान पहुंचे। वहां कई मुर्दा चल रहे थे।

फकीर ने उस लड़के को एक जगह पर बैठाया और कहा कि यहां कुछ देर पहले ही एक लाश जली थी। अब तुम्हें यहां मैं भूत दिखाऊंगा।

फकीर ने फटाफट वहां पर कील गाड़कर एक धागा बांध दिया। अब धागे का आखिरी हिस्सा उस लड़के के हाथ में थमाते हुए कहा, “धागे की सीध में मैंने चार बताशे रखें हैं। इन्हें खाने के लिए चार आत्माएं आएंगी। जबतक आत्मा इन बताशों को पूरा न खा लें, तबतक तुम इस धागे को बिल्कुल भी मत छोड़ना वरना तुम्हारे साथ बहुत बुरा होगा।”

इतना कहकर फकीर ने लड़के को आंखें बंद करने के लिए कहा और खुद मंत्र पढ़ने लगा।

लड़के को फकीर की बातें सुनकर थोड़ा डर लगने लगा, लेकिन वो धागे को तेजी से पकड़कर आंखें बंद करके हुए बैठ गया।

कुछ देर मंत्र पढ़ने के बाद साधु ने उसे आंखों खोलने के लिए आवाज लगाई।

लड़के ने जैसे ही आंखें खोली, तो सामने चार आत्माएं बताशे खा रही थी। उसे इस सब पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। तभी उसकी नजर एक आत्मा पर पड़ी। वो कोई और नहीं उसका पड़ोसी था, जिसकी मौत दो दिन पहले ही हुई थी। उसे देखते ही लड़के के हाथ से वो सफेद धागा छूट गया। उसने घबराहट में आसपास उस फकीर को देखा, लेकिन वो मंत्र पढ़कर जा चुका था।

अब डर के मारे वो तेजी से अपने घर की ओर दौड़ने लगा। इस दौरान उसे कोई बार-बार उसका नाम लेकर पीछे से आवाजें दे रहा था, लेकिन वो मुड़ा नहीं। किसी तरह से वो घर पहुंचा और डरते-डरते ही सुबह हो गई।

सुबह सबसे पहले उसने श्मशान की घटना के बारे में अपने मां-बाप को बताया और सोने के लिए कमरे में चला गया। कुछ देर बाद जब उसकी आंखों खुलीं, तो वो श्मशान में ही था। वो कैसे दोबारा श्मशान घाट पहुंचा किसी को नहीं पता, लेकिन उसी दिन से लड़के की तबीयत दिमागी रूप से खराब रहने लगी।

कहानी से सीख :

इंसान को साहसी होना चाहिए, लेकिन दुस्साहसी होना मुर्खता है।