02 March 2022

अकबर-बीरबल की कहानी: अंधे या देखने वाले - The Blind or The Sighted
akbar birbal andhe ya dekhnewaale baba

एक बार की बात है। अकबर और बीरबल किसी बात पर चर्चा कर रहे थे। तभी एक क्षण ऐसा आया, जब राजा अकबर ने कहा, ‘बीरबल दुनिया में हर 100 आदमी के पीछे एक अंधा व्यक्ति होता है।’ राजा की यह बात सुनकर बीरबल ने उनकी इस बात पर असहमति जताते हुए कहा, ‘महाराज मेरे हिसाब से आपका आकलन कुछ गलत प्रतीत होता है। सही मायने में, तो दुनिया में अंधों की संख्या देखने वालों के मुकाबले काफी अधिक है।’

बीरबल का यह जवाब सुनकर राजा अकबर को काफी आश्चर्य हुआ, उन्होंने कहा, ‘जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, तो देखने वाले लोगों की संख्या अंधों से अधिक ही मालूम होती है। ऐसे में अंधों की संख्या देखने वालों के मुकाबले अधिक कैसे हो सकती है?’

राजा अकबर की इस बात को सुनकर बीरबल कहते हैं, ‘महाराज किसी दिन मैं आपको यह बात प्रमाण के साथ साबित करके जरूर दिखाऊंगा कि दुनिया में अंधों की संख्या देखने वालों से अधिक है।’ बीरबल के जवाब पर राजा अकबर कहते हैं, ‘ठीक है प्रमाण के साथ इस बात को अगर तुम साबित कर पाओगे, तो मैं भी इस बात को जरूर स्वीकार करूंगा।’ उस दिन यह बात यही रुक जाती है।

करीब दो दिन बीतने के बाद राजा अकबर इस बात को पूरी तरह से भूल जाते हैं। मगर, बीरबल अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए युक्ति सोचने में जुटे रहते हैं। करीब चार दिन बीतने के बाद बीरबल को एक योजना सूझती है और वे दो मुनीम को लेकर उनके साथ बाजार की ओर चल देते हैं।

बीच बाजार पहुंचने के बाद बीरबल सिपाहियों से एक चारपाई की चौखट वहां मंगाते हैं और उसे बुनने के लिए रस्सी भी मंगवाते हैं। अब बीरबल अपने साथ लाए दोनों मुनीमों को आदेश देते हैं कि वे उनके दाएं और बाएं कुर्सी डालकर बैठ जाएं। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि दाएं बैठने वाले मुनीम उनके राज्य में मौजूद अंधों की सूची तैयार करेंगे और बाएं बैठने वाले मुनीम देखने वालों की सूची।

बीरबल का आदेश मानते हुए दोनों मुनीम अपना काम करने के लिए कमर कस लेते हैं और बीरबल चारपाई बुनने का काम शुरू कर देते हैं। बीरबल को बीच बाजार चारपाई बुनते देख धीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगती है। उस भीड़ में से एक आदमी अपने आपको रोक नहीं पाता है और वह बीरबल से पूछ लेता है, ‘आप ये क्या कर रहे हैं?’

बीरबल इस सवाल का कोई जवाब नहीं देते और अपने दाएं बैठे मुनीम को इशारा देते हैं कि वह अपनी सूची में इस आदमी का नाम लिख लें। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी और आने वाले सभी लोग अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए बीरबल से यही पूछ रहे थे कि वे यहां क्या कर रहे हैं? इसी के साथ बीरबल अपने दाएं मुनीम को इशारा देकर यह सवाल पूछने वालों का नाम अंधों की लिस्ट में डलवाते जा रहे थे।

तभी अचानक वहां एक आदमी आता है, जो बीरबल से पूछता है कि इतनी धुप में बैठ कर आप चारपाई क्यों बन रहे हैं? तब भी बीरबल कुछ नहीं बोलते हैं और बाएं बैठे मुनीम को यह सवाल पूछने वाले का नाम देखने वालों की सूची में लिखने का इशारा देते हैं। यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है और धीरे-धीरे पूरा दिन निकल जाता है।

तभी इस बात की जानकारी राजा अकबर को होती हैं और वे भी माजरा समझने के लिए बाजार पहुंच जाते हैं, जहां बीरबल चारपाई बुनने का काम कर रहा था। राजा भी बीरबाल से यह सब करने के पीछे की वजह जानना चाहते हैं। इसलिए, वह बीरबल से सवाल करते हैं कि बीरबल यह तुम क्या कर रहे हो?

राजा का सवाल सुनते ही बीरबल अपने दाएं बैठे मुनीम को आदेश देते हैं कि अपनी अंधों की लिस्ट में महाराज अकबर का नाम भी शामिल कर दो। बीरबल की यह बात सुनकर राजा अकबर को थोड़ा गुस्सा आया और आश्चर्य भी हुआ।

राजा अकबर ने कहा, ‘बीरबल मेरी आंखें पूरी तरह से ठीक हैं और मैं सब कुछ अच्छी तरह देख सकता हूं। फिर क्यों तुम मेरा नाम अंधों की सूची में चढ़वा रहे हो?’ राजा अकबर के इस सवाल बार बीरबल मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘महाराज आप देख सकते हैं कि मैं चारपाई बन रहा हूं। फिर भी अपने सवाल किया कि मैं क्या कर रहा हूं? अब महाराज ऐसा सवाल तो एक अंधा व्यक्ति ही पूछ सकता है।’

बीरबल का यह उत्तर सुन राजा अकबर को समझ में आ गया कि वह कुछ दिन पहले की गई बात को प्रमाणित करने के लिए यह सब कर रहा है। यह बात समझ में आते ही राजा अकबर भी मुस्कुराते हैं और पूछते हैं, ‘बीरबल तो फिर बताओं कि तुमने अपने इस प्रयास से क्या पता लगाया? बताओ देखने वालों की संख्या अधिक है या अंधों की?’

राजा के सवाल पर बीरबल जवाब देते हैं, ‘महाराज मैंने जो कहा था, वहीं बात सच निकली कि दुनिया में देखने वालों के मुकाबले अंधों की संख्या ज्यादा है। मेरे द्वारा तैयार की गई दोनों सूची का मिलान करने से आप भी इस बात को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।’

बीरबल का उत्तर सुनकर राजा अकबर जोर से हंसते हैं और कहते हैं, ‘बीरबल तुम अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ भी कर सकते हो।’

कहानी से सीख

अकबर बीरबल अंधे बाबा की इस कहानी से यह सीख मिलती है कि दिखाई देने के बाद भी मूर्खता पूर्ण सवाल करने वाला व्यक्ति किसी अंधे के समान ही होता है।

18 February 2022

अकबर-बीरबल की कहानी: कौन है असली मां? | Asli Maa Kaun Hai Kahani
akbar birbal asli maa kaun hai

एक बार शहंशाह अकबर के दरबार में बहुत ही अजीब मुकदमा आया, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

हुआ यूं कि बादशाह अकबर के दरबार में दो महिलाएं रोती हुई पहुंची। उनके साथ में लगभग 2 या 3 साल का सुंदर-सा बच्चा भी था। दोनों महिलाएं लगातार रो रही थीं और साथ ही दावा कर रही थीं कि बच्चा उनका है। अब समस्या ये थी कि दोनों शहर के बाहर रहती थीं, जिस कारण उन्हें कोई नहीं जाता था। इसलिए, यह बताना मुश्किल था कि उस नन्हे से बच्चे की असली मां कौन है।

अब अकबर बादशाह के सामने मुसीबत आ गई कि न्याय कैसे करें और बच्चा किसको दें। इस बारे में उन्होंने एक-एक करके सभी दरबारियों की राय ली, लेकिन कोई भी इस गुत्थी को नहीं सुलझा सका और तभी बीरबल दरबार में पहुंच गए।

बीरबल को देखकर बादशाह अकबर की आंखों में मानो चमक आ गई हो। बीरबल के आते ही अकबर ने इस समस्या के बारे में उन्हें बताया। अकबर ने बीरबल से कहा कि अब तुम ही इस समस्या का समाधान करो। बीरबल कुछ सोचते रहे और फिर जल्लाद को बुलाने के लिए कहा।

जल्लाद के आते ही बीरबल ने बच्चे को एक जगह बैठा दिया और कहा, “एक काम करते हैं इस बच्चे के दो टुकड़े कर देते हैं। एक-एक टुकड़ा दोनों मांओं को दे देंगे। अगर इन दोनों महिलाओं में से किसी एक को यह बात मंजूर नहीं है, तो जल्लाद उस महिला के दो टुकड़े कर देगा।”

यह बात सुनते ही उनमें से एक महिला बच्चे के टुकड़े करने की बात मान गई और बोली कि उसे आदेश मंजूर है। वह बच्चे के टुकड़े को लेकर चली जाएगी, लेकिन दूसरी महिला बिलख-बिलख कर रोने लगी और बोलने लगी, “मुझे बच्चा नहीं चाहिए। मेरे दो टुकड़े कर दो, लेकिन बच्चे को मत काटो। यह बच्चा दूसरी महिला को दे दाे।”

यह देखकर सभी दरबारी मानने लगे कि जो महिला डर की वजह से रो रही है वहीं दोषी है, लेकिन तभी बीरबल ने कहा कि जो महिला बच्चे के टुकड़े करने के लिए तैयार है उसे कैद कर लो वही मुजरिम है। इस बात को सुनकर वह महिला रोने लगी और मांफी मांगने लगी, लेकिन बादशाह अकबर ने उसे जेल में डलवा दिया।

बाद में अकबर ने बीरबल से पूछा कि तुमको कैसे पता चला कि असली मां कौन है? तब बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज मां सारी मुसीबतों को अपने सिर पर ले लेती है, लेकिन बच्चे पर आंच भी नहीं आने देती और यही हुआ। इससे पता चल गया कि असली मां वह है जो खुद के टुकड़े करवाने के लिए तैयार है, लेकिन बच्चे के नहीं।”

बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर एक बार फिर बीरबल की बुद्धि के कायल हो गए।

कहानी से सीख

हमें कभी भी किसी दूसरे की चीज पर अपना हक नहीं जताना चाहिए। साथ ही हमेशा सच्चाई की ही जीत होती है और समझदारी से काम लेने पर हर समस्या का हल निकल आता है। 

अकबर-बीरबल की कहानी: गलत आदत | Akbar Birbal Aur Galat Aadat
Akbar Birbal Aur Galat Aadat

एक वक्त की बात है, बादशाह अकबर किसी एक बात को लेकर बहुत परेशान रहने लगे थे। जब दरबारियों ने उनसे पूछा, तो बादशाह बोले, ‘हमारे शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत पड़ गई है, कई कोशिश के बाद भी हम उनकी यह आदत छुड़ा नहीं पा रहे हैं।’

बादशाह अकबर की परेशानी सुनकर किसी दरबारी ने उन्हें एक फकीर के बारे में बताया, जिसके पास हर मर्ज का इलाज था। फिर क्या था, बादशाह ने उस फकीर को दरबार में आने का निमंत्रण दिया।

जब फकीर दरबार में आया, तो बादशाह अकबर ने उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताया। फकीर ने बादशाह की पूरी बात सुनकर परेशानी को दूर करने का वादा किया और एक हफ्ते का समय मांगा।

जब एक हफ्ते के बाद फकीर दरबार में आया, तो उन्होंने शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत के बारे में प्यार से समझाया और उसके नुकसान भी बताए। फकीर की बातों का शहजादे पर बहुत प्रभाव पड़ा और उसने अंगूठा न चूसने का वादा भी किया।

सभी दरबारियों ने यह देखा, तो बादशाह से कहा, ‘जब यह काम इतना आसान था, तो फकीर ने इतना समय क्यों लिया। आखिर उसने क्यों दरबार का और आपका समय खराब किया।’ बादशाह दरबारियों की बातों में आ गए और उन्होंने फकीर को दंड देने की ठान ली।

सभी दरबारी बादशाह का समर्थन कर रहे थे, लेकिन बीरबल चुपचाप था। बीरबल को चुपचाप देख, अकबर ने पूछा, ‘तुम क्यों शांत हो बीरबल?’ बीरबल ने कहा, ‘जहांपनाह गुस्ताखी माफ हो, लेकिन फकीर को सजा देने के स्थान पर उन्हें सम्मानित करना चाहिए और हमें उनसे सीखना चाहिए।’

तब बादशाह ने गुस्से में कहा, ‘तुम हमारे फैसले के खिलाफ जा रहे हो। आखिर तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया, जवाब दो।’

तब बीरबल ने कहा, ‘महाराज पिछली बार जब फकीर दरबार में आए थे, तो उन्हें चूना खाने की बुरी आदत थी। आपकी बातों को सुनकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने पहले अपनी इस गंदी आदत को छोड़ने का फैसला लिया फिर शहजादे की गंदी आदत छुड़ाई।’

बीरबल की बात सुनकर दरबारियों और बादशाह अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ और सभी ने फकीर से क्षमा मांगकर उसे सम्मानित किया।

कहानी से सीख:

हमें दूसरों को सुधारने के पहले खुद सुधरना चाहिए, इसके बाद ही दूसरों को ज्ञान देना चाहिए।

अकबर-बीरबल की कहानी: स्वर्ग की यात्रा | Birbal’s Journey To Heaven In Hindi
Birbal’s Journey To Heaven In Hindi

एक बार की बात है, राजा अकबर अपने दरबार में बैठकर कुछ विचार कर रहे थे। तभी अचानक उन्हें ख्याल आया कि उनकी दाढ़ी और बाल काफी बढ़ गए हैं। इस ख्याल के आते ही उन्होंने अपने एक दरबारी को बुलाकर नाई को फौरन हाजिर होने का संदेश भिजवाया। राजा का संदेश मिलते ही नाई महल पहुंच गया।

महल पहुंचकर नाई राजा की हजामत बना ही रहा था कि कहीं से एक कौवा वहां आकर बैठ जाता है और कांव-कांव करने लगता है। राजा अकबर नाई से पूछते हैं, “यह कौवा कांव-कांव क्यों कर रहा है?” इस पर नाई जवाब देता है, “यह आपके पूर्वजों का हाल-चाल बताने आया है।”

नाई के इतना कहते ही राजा अकबर आश्चर्य से पूछते हैं, “तो बताओ फिर यह कौवा मेरे पूर्वजों के बारे में आखिर क्या बता रहा है?”

राजा के इस सवाल पर नाई कहता है, “यह कौवा कह रहा है कि आपके पूर्वज स्वर्ग में मुसीबत में हैं और काफी परेशान हैं। उनका हालचाल लेने के लिए आपको अपने किसी करीबी को स्वर्ग भेजना चाहिए।”

नाई की यह बात सुनकर राजा अकबर और भी हैरान हो जाते हैं। राजा अकबर आश्चर्य से नाई से पूछते हैं, “आखिर किसी इंसान को जिंदा स्वर्ग में कैसे भेजा जा सकता है?”

राजा के इस सवाल पर नाई जवाब देता है, “महाराज मेरी नजर में एक पुरोहित है, जो इस काम को अंजाम दे सकता है। बस आप इस काम के लिए अपने किसी करीबी को स्वर्ग जाने के लिए राजी कर लीजिए।”

नाई के इस आश्वासन पर राजा अकबर तैयार हो जाते हैं और दरबार में अपने सभी करीबी दरबारियों को बुलाते हैं। राजा के आदेश पर सभी करीबी दरबारी राजा अकबर के सामने हाजिर हो जाते हैं।

सभी दरबारी राजा से अचानक बुलाने की वजह पूछते हैं। इस पर राजा उन्हें नाई के साथ हुई सारी बात सुनाते हैं। राजा की बात सुनकर सभी दरबारी एक मत में बीरबल का नाम आगे रखते हैं। दरबारी कहते हैं कि स्वर्ग जाकर पूर्वजों का हाल-चाल लेने के लिए बीरबल से उचित व्यक्ति और कोई नहीं हो सकता, क्योंकि बीरबल हम सब में सबसे ज्यादा बुद्धिमान और चतुर है। इसलिए, स्वर्ग में आपके पूर्वजों का हाल-चाल लेकर वह उनकी परेशानी का हल आसानी से निकाल सकता है।

राजा अकबर दरबारियों की इस सलाह को मानते हुए बीरबल को स्वर्ग भेजने की तैयारी कर लेते हैं। इस बात का पता चलते ही बीरबल शहंशाह अकबर से पुरोहित को बुलाकर स्वर्ग भेजने की विधि के बारे में पूछते हैं।

बीरबल की इस बात पर राजमहल में पुरोहित को बुलवाया जाता है। पुरोहित के आते ही उनसे स्वर्ग जाने की विधि के बारे में पूछा जाता है। पुरोहित बताते हैं, “आपको यहीं पास में मौजूद एक घास के ढेर में भेजा जाएगा। बाद में उस ढेर में आग लगा दी जाएगी। फिर कुछ मंत्रों की शक्ति से आपको स्वर्ग भेज दिया जाएगा।”

स्वर्ग जाने की पूरी प्रक्रिया जानने के बाद बीरबाल राजा अकबर से करीब 11 दिन का समय मांगते हैं और पुरोहित को 11 दिन बाद बुलाने की बात रखते हैं। वह कहते हैं, “मैं स्वर्ग जा रहा हूं और कितने दिन मुझे लौटने में लगेंगे इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। इसलिए, स्वर्ग जाने से पहले एक बार मैं अपने परिवार से मिलना चाहता हूं और कुछ समय बिताना चाहता हूं।”

बीरबल अपने घर जाने के लिए महल से रवाना हो जाते हैं। देखते-देखते 11 दिन बीत जाते हैं। 12वें दिन बीरबल स्वर्ग जाने के लिए राजा अकबर के सामने हाजिर होते हैं। पुरोहित को बुलाया जाता है और बीरबल को स्वर्ग भेजने की तैयारी की जाने लगती हैं।

पुरोहित बीरबल को स्वर्ग भेजने के लिए महल से कुछ दूर घास का एक ढेर लगवाते हैं। बीरबल को स्वर्ग भेजने के लिए घास के ढेर के अंदर भिजवाया जाता है। घास के ढेर के अंदर जाते ही पुरोहित घास के ढेर में आग लगा देते हैं और बीरबल को स्वर्ग भेजने की प्रक्रिया पूरी होती है।

धीरे-धीरे दो महीने बीत जाते हैं और राजा अकबर को बीरबल की चिंता होने लगती है। तभी अचानक बीरबल दरबार में हाजिर हो जाते हैं। राजा अकबर, बीरबल को देखकर प्रसन्न होते हैं और अपने पूर्वजों का हाल-चाल पूछते हैं।

तब बीरबल बताते हैं, “आपके पूर्वज काफी खुश हैं और मजे में हैं। उन्हें बस एक ही तकलीफ है कि उनकी दाढी और बाल काफी बड़े हो गए हैं, जिन्हें काटने वाला स्वर्ग में कोई नाई नहीं है। इसलिए, वहां उन्हें एक नाई की जरूरत है।”

बीरबल कहते हैं, “ऐसे में हमें आपके पूर्वजों के लिए एक अच्छे नाई को स्वर्ग भेजने की तैयारी करनी चाहिए।” बीरबल की इस बात पर राजा नाई को स्वर्ग जाने का आदेश देते हैं।

राजा का आदेश सुनकर नाई घबरा जाता है और राजा के पैरों में गिरकर माफी मांगने लगता है। नाई राजा से कहता है कि यह सब कुछ उसने वजीर अब्दुल्लाह के कहने पर किया था। यह सब उन्हीं की साजिश थी, ताकि वह बीरबल को अपने रास्ते से हटा सकें। अब राजा अकबर के सामने सारी सच्चाई आ चुकी थी। ये सब जानने के बाद राजा अकबर ने वजीर अब्दुल्लाह और उनके साथियों को दंड देने का आदेश दिया।

अंत में राजा अकबर, बीरबल से पूछते हैं, “तुम्हें इस सच्चाई का पता कैसे चला और तुम घास के ढेर में आग लगने के बाद कैसे बच गए?” तब बीरबल जवाब देते हैं, “आग के ढेर में जाने कि बात सुनकर मुझे इस साजिश का अंदाजा हो गया था। इसी वजह से मैंने 11 दिन का समय मांगा था। उन 11 दिनों में मैंने उस घास के ढेर वाले स्थान के नीचे से अपने घर तक एक सुरंग बनवा दी थी। उस सुरंग के जरिए ही मैं वहां से बचकर निकल पाया।”

बीरबल की पूरी बात सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और बोले, “वाह! बीरबल वाह! यह काम केवल तुम ही कर सकते थे।”

कहानी से सीख : बीरबल की स्वर्ग की यात्रा कहानी से सीख मिलती है कि सूझबूझ से बड़ी से बड़ी परेशानी का हल आसानी से निकाला जा सकता है।

अकबर-बीरबल की कहानी: बादशाह का सपना | Badshah Ka Sapna
Badshah Ka Sapna

चतुराई और बुद्धि के सही इस्तेमाल के लिए बीरबल के किस्से खूब मशहूर हैं। बादशाह अकबर के ऊपर आई मुसीबतों को बीरबल हमेशा चुटकियों में सुलझा देते थे। सिर्फ असल जिंदगी की परेशानी ही नहीं, बल्कि बादशाह के सपनों की गुत्थियों का जवाब भी बीरबल के पास होता था। ऐसा ही एक किस्सा है, बादशाह के अजीब सपने का। आइए, आपको सुनाते हैं पूरी कहानी।

एक बार की बात है, जब बादशाह अकबर गहरी नींद से अचानक उठ गए और फिर रात भर सो नहीं सके। वो बहुत परेशान थे, क्योंकि उन्होंने अजीब-सा सपना देखा था, जिसका मतलब वो समझ नहीं पा रहे थे। उन्होंने देखा कि उनके एक के बाद एक सारे दांत गिरते चले गए और आखिर में सिर्फ एक ही दांत बचा। इस सपने से वह इतने चिंतित हुए कि उन्होंने इसके बारे में सभा में चर्चा करने के बारे में सोचा।

अगले दिन सभा में पहुंचते ही अकबर ने अपने विश्वसनीय मंत्रियों को सपना सुनाया और सभी से राय मांगी। सभी ने उन्हें सुझाव दिया कि इस बारे में किसी ज्योतिष से बात करके सपने का मतलब समझना चाहिए। बादशाह को भी यह बात सही लगी।

अगले दिन उन्होंने दरबार में विद्वान ज्योतिषों को बुलवाया और अपना सपना सुनाया। इसके बाद सभी ज्योतिषों ने आपस में विचार-विमर्श किया। फिर उन्होंने बादशाह से कहा, “जहांपनाह, इस सपने का एक ही मतलब निकलता है कि आपके सभी रिश्तेदार आपसे पहले ही मर जाएंगे।”

ज्योतिषों की यह बात सुनकर अकबर को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने सभी ज्योतिषों को दरबार से जाने का आदेश दिया। उन सभी के जाने के बाद बादशाह अकबर ने बीरबल को बुलाया और कहा, “बीरबल, तुम्हारे अनुसार हमारे सपने का मतलब क्या होगा?”

बीरबल ने कहा, “हुजूर, मेरे हिसाब से आपके सपने का मतलब यह था कि आपके सभी रिश्तेदारों में से आपकी उम्र सबसे ज्यादा होगी और आप उन सभी से ज्यादा समय तक जीते रहेंगे।” इस बात को सुनकर बादशाह अकबर बहुत खुश हो गए।

वहां मौजूद सभी मंत्रियों ने सोचा कि बीरबल ने भी ज्योतिषों की ही बात को दोहराया है। इतने में बीरबल ने उन मंत्रियों से कहा कि देखो, बात वही थी, बस कहने का तरीका अलग था। बात को हमेशा सही तरीके से सामने रखा जाना चाहिए। मंत्रियों को इतना कहकर बीरबल सभा से चले गए।

कहानी से सीख :

किसी भी बात को बोलने का एक सही तरीका होता है। विचलित करने वाली बात को भी सही तरीके से कहा जाए, तो उसका बुरा नहीं लगता। इसी वजह से बात को हमेशा सही तरीका और सलीके से रखा जाना चाहिए। 

अकबर-बीरबल और सबसे खूबसूरत बच्चा | Sabse Khoobsurat Bachha
Sabse Khoobsurat Bachha

एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने शहजादे के साथ राज-दरबार में उपस्थित थे। दरबार में मौजूद हर किसी की नजर शहजादे पर थी। वहां मौजूद हर कोई यही कह रहा था कि शहजादा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है। सभी की बात सुनकर बादशाह अकबर ने भी मुस्कुराकर यही कहा कि उनका शहजादा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है। सभी दरबारी अकबर की इस बात पर हामी भरते हैं। तभी अकबर बीरबल से पूछते हैं कि तुम्हारा इस बारे में क्या विचार है।

बीरबल : महाराज, शहजादा सुंदर है, लेकिन मेरे ख्याल से शहजादा पूरी दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा नहीं है।

अकबर : बीरबल तुम्हारे कहने का क्या मतलब है कि शहजादा सुंदर नहीं है?

बीरबल : नहीं नहीं, जहांपनाह मेरा कहने का मतलब यह नहीं था। आप मेरी बात का गलत मतलब न निकालें। हमारा शहजादा बहुत खूबसूरत है, लेकिन दुनिया में और भी सुंदर बच्चे होंगे।

अकबर : तो क्या हम यह समझें कि पूरी दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा हमारा शहजादा नहीं है।

बीरबल : जी जहांपनाह, मेरी बातों का यही मतलब है।

अकबर : बीरबल अगर तुम्हारा यह कहना है कि दुनिया में शहजादे से भी ज्यादा खूबसूरत बच्चा है, तो तुम उसे हमारे समक्ष लेकर आओ।

अकबर का आदेश सुनकर बीरबल शहजादे से भी ज्यादा सुंदर बच्चे की खोज में निकल जाता है। कुछ दिन बीतने के बाद बीरबल राज दरबार आता है। बीरबल राज-दरबार में अकेले आता है, यह देख अकबर खुश होकर कहता है, ‘क्यों बीरबल अकेले आये हो, मतलब तुम्हें शहजादे से अधिक खूबसूरत बच्चा नहीं मिला?’

बीरबल : जहांपनाह, मैं आपको इस बात की सूचना देने आया हूं कि मैंने शहजादे से भी अधिक सुंदर बच्चा खोज लिया है।

अकबर : अगर बच्चा मिल गया है, तो तुम उसे दरबार में क्यों नहीं लाए?

बीरबल : मैं उसे दरबार में लेकर नहीं आ सकता हूं, लेकिन मैं आपको उस तक लेकर जरूर जा सकता हूं।

अकबर : ऐसा कौन-सा कारण है, जिसकी वजह से तुम उसे दरबार में नहीं ला सकते?

बीरबल : यह तो आपको वहां जाकर ही पता चलेगा।

अकबर : ठीक है फिर, हम कल सुबह उस बच्चे को देखने जाएंगे।

बीरबल : जहांपनाह, उस बच्चे को देखने जाने के लिए हमे भेष बदलना होगा।

अकबर: उस बच्चे से मिलने के लिए हम यह भी कर लेंगे।

अगले दिन सुबह अकबर और बीरबल भेष बदलकर उस बच्चे को देखने के लिए चले जाते हैं। बीरबल अकबर को एक झोपड़ी में लेकर जाता है, जहां एक छोटा-सा बच्चा मिट्टी के साथ खेल रहा होता है।

बीरबल: उस बच्चे को दिखाते हुए कहता है कि वो रहा सबसे सुंदर बच्चा।

अकबर: तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने एक बदसूरत और झोपड़ी में रहने वाले बच्चे को संसार का सबसे सुंदर बच्चा बता दिया।

अकबर की बातें सुनकर बच्चा जोर-जोर से रोने लगता है, जिसे सुनकर उसकी मां झोपड़ी के अंदर से आती है और अकबर को गुस्से में कहती है, ‘तुमने मेरे बच्चे को बदसूरत कैसे कह दिया? मेरा बच्चा संसार का सबसे सुंदर बच्चा है। अगर दोबारा मेरे बच्चे को बदसूरत कहा, तो मैं तुम दोनों की हड्डी-पसली एक कर दूंगी। यहां से चले जाओ और दोबारा यहां दिखाई नहीं देना।’ इतना कहने के बाद वो मां अपने बच्चे को खिलाने लगती है और कहती है, ‘मेरा बच्चा संसार का सबसे सुंदर बच्चा है।’ बादशाह अकबर उस मां की बात सुनकर खामोश हो जाते हैं।

बीरबल: जहांपनाह, अब आपको सब समझ में आ गया होगा।

अकबर: हां, अब मैं अच्छे से समझ गया हूं।

बीरबल : बादशाह अकबर बच्चा कैसा भी हो, माता-पिता के लिए उनका बच्चा संसार का सबसे सुंदर बच्चा ही होता है।

अकबर : बीरबल तुम सही बोल रहे हो, हर माता-पिता के लिए उनका बच्चा सुंदर होता है।

बीरबल : जहांपनाह, मैं बस इतना चाहता हूं कि आप शहजादे को चापलूसों से दूर रखकर अच्छी तालीम दें।

अकबर: बीरबल तुमने एक बार फिर हमारा दिल जीत लिया।

कहानी से सीख:

कभी किसी चीज को लेकर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक न एक दिन वो घमंड टूटता जरूर है।

अकबर-बीरबल की कहानी: मूर्ख लोगों की सूची | Murkh Logo Ki Suchi
Murkh Logo Ki Suchi

एक वक्त की बात है, बादशाह अकबर अपने दरबारियों के साथ दरबार में मौजूद थे। तभी उनके मन में एक बात आती है। बादशाह बोलते हैं कि मेरे आसपास हमेशा बुद्धिमान लोग रहते हैं और मैं उनके बीच रहकर बोर हो गया हूं। मैंने फैसला किया है कि मुझे कुछ मूर्ख व्यक्तियों से मिलना चाहिए। अकबर, बीरबल से कहते हैं, ‘तुमने हमेशा हमारी मदद अपने ज्ञान और चतुराई से की है। हम चाहते हैं कि इस बार भी तुम ऐसा ही कुछ करो और हमारे लिए 6 मूर्ख व्यक्ति ढूंढ कर लेकर आओ।’

बीरबल : जी जहांपनाह, मैं आपके लिए 6 मुर्ख व्यक्ति जरूर ढूंढकर लाऊंगा।

अकबर : हम आपको 6 मूर्ख व्यक्ति ढूंढने के लिए 30 दिन का समय देते हैं।

बीरबल : जहांपनाह, मुझे इतने अधिक समय की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अकबर : ठीक है, अगर तुम उससे पहले ही मूर्ख व्यक्ति ले आ सकते हो, तो यह अच्छी बात है।

इसके बाद बीरबल मूर्ख व्यक्तियों की तलाश में निकल पड़ता है। बीरबल रास्ते में पूरा समय इसी सोच में था कि उसे वो मूर्ख लोग कहां मिलेंगे। तभी उसे गधे पर बैठा एक आदमी दिखाई देता है, जो सिर पर घास की गठरी रखे हुए था। बीरबल ने तुरंत घोड़ा रोका और उससे उसकी पहचान पूछने लगा।

बीरबल : कौन हो तुम और ऐसे गधे पर बैठकर और घास अपने सिर पर लेकर क्यों जा रहे हो?

व्यक्ति : मैं रामू हूं और मेरा गधा कमजोर व थका हुआ है, इसलिए गधे का बोझ कम करने के लिए मैंने घास की गठरी अपने सिर पर रखी है।

यह सुनकर बीरबल सोचता है कि मुझे पहला मूर्ख व्यक्ति मिल गया। फिर बीरबल उससे कहता है कि तुम जानवरों के बारे में इतना सोचते हो, इसलिए मैं तुम्हें बादशाह अकबर से इनाम दिलवाऊंगा। यह कहकर बीरबल उस व्यक्ति को अपने साथ चलने के लिए कहता है। इनाम की बात सुनकर रामू बीरबल के साथ हो लेता है।

बीरबल और रामू कुछ दूर चले ही थे कि बीरबल को दो व्यक्ति आपस में लड़ाई करते हुए दिखाई दिए। बीरबल उन दोनों व्यक्तियों को लड़ने से रोकता है और उनसे पूछता है कि तुम दोनों कौन हो और किस बात के लिए लड़ रहे हो?

पहला व्यक्ति : जनाब मेरा नाम चंगु है।

दूसरा व्यक्ति : और मेरा मंगू है।

मंगू : जनाब, मुझे चंगु कहता है कि इसके पास शेर है, जिसे वो मेरी गाय के शिकार के लिए छोड़ेगा।

चंगु : हां मैं ऐसा ही करूंगा और मुझे बहुत मजा भी आने वाला है।

बीरबल : कहां है तुम लोगों की गाय और शेर?

मंगू :  जनाब जब भगवान हमें वरदान देने आएंगे, तो मैं उनसे गाय मांगूंगा और चंगु शेर मांगेगा,

जिसे यह मेरी गाय पर छोड़ने की बात कर रहा है।

बीरबल: अच्छा यह बात है।

उनकी बातें सुनकर बीरबल समझ गया कि उन्हें दो और मूर्ख व्यक्ति मिल गए हैं। बीरबल इनाम की बात कहकर उन्हें भी अपने साथ ले लेता है। उन तीनों को लेकर बीरबल अपने घर पहुंचता है और फिर सोचने लगता है कि बाकी के मूर्ख व्यक्ति कहा से ढूंढकर लाऊं। बीरबल उन तीनों मूर्खों को अपने घर में ही रहने के लिए कहकर बाहर चला जाता है। जब बीरबल और मूर्ख लोगों को ढूंढने के लिए बाहर आता है, तो उसे एक व्यक्ति दिखाई देता है, जो कुछ ढूंढता रहता है। बीरबल उसके पास जाकर पूछता है कि आप क्या ढूंढ रहे हैं?

व्यक्ति : जनाब मेरी अंगूठी कहीं गिर गई है, जिसे मैं काफी समय से खोज रहा हूं, लेकिन मुझे नहीं मिल रही है।

बीरबल : क्या आपको पता है कि अंगूठी कहां गिरी थी?

व्यक्ति : दरअसल, मेरी अंगूठी यहां से दूर उस पेड़ के पास गिरी थी, लेकिन वहां अंधेरा होने के कारण मैं यहां उसे ढूंढ रहा हूं।

बीरबल : अच्छा यह बात है। आप कल हमारे साथ बादशाह के दरबार में चलो। मैं बादशाह अकबर से आपको दूसरी अंगूठी देने के लिए कहूंगा।

व्यक्ति : अच्छा ठीक है फिर (खुश होकर)।

अगले दिन सुबह बीरबल दरबार में उन चारों मूर्खों को लेकर पहुंचता है।

बीरबल : बादशाह अकबर मैं आपके कहे अनुसार मूर्ख व्यक्तियों को ढूंढ कर ले आया हूं।

अकबर : बीरबल तुमने तो एक ही दिन में मूर्ख व्यक्ति ढूंढ लिए, क्या हमारे राज्य में मूर्खों की संख्या अधिक है और तुम यकीन के साथ कैसे कह सकते हो कि ये व्यक्ति मूर्ख हैं?

बीरबल ने बादशाह से सारी बातें बताई। फिर अकबर कहते हैं कि ये तो केवल चार ही लोग हैं, बाकी के दो मूर्ख कहां हैं?

बीरबल : जहांपनाह यहां पर 6 मूर्ख व्यक्ति हैं?

अकबर : यहां कहां हैं और कौन हैं, हमें भी बताओ।

बीरबल : जहांपनाह, एक तो मैं स्वयं हूं।

अकबर : तुम मूर्ख कैसे हुए?

बीरबल : मैं इसलिए मूर्ख हूं, क्योंकि मैं इन मूर्खों को खोजकर लाया।

अकबर : फिर अकबर हंसने लगता है और कहता है कि मैं समझ गया कि दूसरा मूर्ख कौन है। पर मैं तुमसे सुनना चाहता हूं।

बीरबल: दूसरे आप हैं जहांपनाह, जो आपने मुझे मूर्ख व्यक्तियों को लाने के लिए कहा।

बीरबल की बातें सुनकर अकबर उसकी प्रशंसा करने लगते हैं और कहते हैं कि बीरबल के पास हर सवाल का जवाब होता है।

कहानी से सीख:

दिमाग और चतुराई से हर मुश्किल काम आसान हो सकता है, लेकिन ऐसे कामों में अपना कीमती समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए, जिसका कोई मतलब न हो।

अकबर-बीरबल की कहानी: सोने का खेत | The Golden Farm Story In Hindi
The Golden Farm Story In Hindi

अकबर के महल में कई कीमती सजावट की वस्तुएं थीं, लेकिन एक गुलदस्ते से अकबर को खास लगाव था। इस गुलदस्ते को अकबर हमेशा अपनी पलंग के पास रखवाते थे। एक दिन अचानक महाराज अकबर का कमरा साफ करते हुए उनके सेवक से वह गुलदस्ता टूट गया। सेवक ने घबराकर उस गुलदस्ते को जोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। हार कर उसने टूटा गुलदस्ता कूड़ेदान में फेंक दिया और दुआ करने लगा कि राजा को इस बारे में कुछ पता न चले।

कुछ देर बाद महराज अकबर जब महल लौटे, तो उन्होंने देखा कि उनका प्रिय गुलदस्ता अपनी जगह पर नहीं है। राजा ने सेवक से उस गुलदस्ते के बारे में पूछा, तो सेवक डर के मारे कांपने लगा। सेवक को जल्दी में कोई अच्छा बहाना नहीं सूझा, तो उसने कहा कि महाराज उस गुलदस्ते को मैं अपने घर ले गया हूं, ताकि अच्छे से साफ कर सकूं। यह सुनते ही अकबर बोले, “मुझे तुरंत वो गुलदस्ता लाकर दो।”

अब सेवक के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। सेवक ने महराज अकबर को सच बता दिया कि वो गुलदस्ता टूट चुका है। यह सुनकर राजा आग बबूला हो गए। क्रोध में राजा ने उस सेवक को फांसी की सजा सुना दी। राजा ने कहा, “झूठ मैं बर्दाश्त नहीं करता हूं। जब गुलदस्ता टूट ही गया था, तो झूठ बोलने की क्या जरूरत थी”।

अगले दिन इस घटना के बारे में जब सभा में जिक्र हुआ तो बीरबल ने इस बात का विरोध किया। बीरबल बोले कि झूठ हर व्यक्ति कभी-न-कभी बोलता ही है। किसी के झूठ बोलने से अगर कुछ बुरा या गलत नहीं होता, तो झूठ बोलना गलत नहीं है। बीरबल के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर अकबर उसी समय बीरबल पर भड़क गए। उन्होंने सभा में लोगों से पूछा कि कोई ऐसा है यहां जिसने झूठ बोला हो। सबने राजा को कहा कि नहीं वो झूठ नहीं बोलते। यह बात सुनते ही राजा ने बीरबल को राज्य से निकाल दिया।

राज दरबार से निकलने के बाद बीरबल ने ठान ली कि वो इस बात को साबित करके रहेंगे  कि हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी-न-कभी झूठ बोलता है। बीरबल के दिमाग में एक तरकीब आई, जिसके बाद बीरबल सीधे सुनार के पास गए। उन्होंने जौहरी से सोने की गेहूं जैसी दिखने वाली बाली बनवाई और उसे लेकर महाराज अकबर की सभा में पहुंच गए।

अकबर ने जैसे ही बीरबल को सभा में देखा, तो पूछा कि अब तुम यहां क्यों आए हो। बीरबल बोले, “जहांपनाह आज ऐसा चमत्कार होगा, जो किसी ने कभी नहीं देखा होगा। बस आपको मेरी पूरी बात सुननी होगी।” राजा अकबर और सभी सभापतियों की जिज्ञासा बढ़ गई और राजा ने बीरबल को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी।

बीरबल बोले, “आज मुझे रास्ते में एक सिद्ध पुरुष के दर्शन हुए। उन्होंने मुझे यह सोने से बनी गेहूं की बाली दी है और कहा कि इसे जिस भी खेत में लगाओगे, वहां सोने की फसल उगेगी। अब इसे लगाने के लिए मुझे आपके राज्य में थोड़ी-सी जमीन चाहिए।” राजा ने कहा, “यह तो बहुत अच्छी बात है, चलो हम तुम्हें जमीन दिला देते हैं।” अब बीरबल कहने लगे कि मैं चाहता हूं कि पूरा राज दरबार यह चमत्कार देखे। बीरबल की बात मानते हुए पूरा राज दरबार खेत की ओर चल पड़ा।

“खेत में पहुंचकर बीरबल ने कहा कि इस सोने से बनी गेहूं की बाली से फसल तभी उगेगी, जब इसे ऐसा व्यक्ति लगाए, जिसने जीवन में कभी झूठ न बोला हो। बीरबल की बात सुनकर सभी राजदरबारी खामोश हो गए और कोई भी गेहूं की बाली लगाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

राजा अकबर बोले कि क्या राजदरबार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने अपने जीवन में कभी झूठ न बोला हो? सभी खामोश थे। बीरबल बोले, “जहांपनाह अब आप ही इस बाली को खेत में रोप दीजिए।” बीरबल की बात सुनकर महाराज का सिर झुक गया। उन्होंने कहा, “बचपन में मैंने भी कई झूठ बोले हैं, तो मैं इसे कैसे लगा सकता हूं।” इतना कहते ही बादशाह अकबर को यह बात समझ आ गई कि बीरबल सही कह रहे थे कि इस दुनिया में कभी-न-कभी सभी झूठ बोलते हैं। इस बात का एहसास होते ही अकबर उस सेवक की फांसी की सजा को रोक देते हैं।

कहानी से सीख :

बिना सोचे समझे किसी को बड़ा दण्ड नहीं देना चाहिए। हर काम को सोच-विचार कर ही किया जाना चाहिए। साथ ही एक छोटे से झूठ की वजह से किसी व्यक्ति का आंकलन भी नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है कि लोग झूठ बोल देते हैं।